Tuesday, 11 September 2012

प्रीत का उपकार



प्रीत का कैसे उपकार करूँ
प्रेम से बंधा प्रेमाहार दूँ
शुभ बोलो की शुभकामनायें
शब्दों से गुंथे शब्दाहार से
श्रिंगार करूँ
अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति
कैसे व्यक्त करूँ
नीरस जीवन को सदाबहार कीया तुने
बंजर दिल में फूल खिलाये

इन्ही फूलों से तेरा आंगन सजाऊँ
नौबहारों से सुसजित
जीवन खुशियों से सरोबार हो
यही कामना बार बार करूँ

बलबीर राणा "भैजी"
११ सितम्बर  २०१२

0 comments: