Friday, 14 December 2012

माँ भारती के शेर



माँ भारती के शेर हो।
अजीत रहो, अभीत रहो।
कदम कहीं रूके नहीं,
थमे नही डगर यहीं,
बडे चलो चडे चलो।
दुष्मनो के सिरों को कुचलते चलो।

बडे चलो चडे चलो,
देश द्रोहियों का दमन करते चलो।
धरा पर जो तेरे कदम रखे,
कदम उनके उखाडते चलो।

हौंसला कभी टुटे नहीं,
पीछे कभी मुडे नहीं,
आखरी शांस जब तक दम पे हो,
दुष्मनों के दम पे दम, निकालते चलो।
बडे चलो चडे चलो।

फौलाद बन बढते रहो,
सोला बन भडकते रहो,
माँ भारती की रक्षा के खातिर,
अडिग रहो, अमिट रहो।
बडे चलो चडे चलो
दुष्मनो के सिरों को कुचलते चलो।

तुझे तेरी जननी की कसम,
नाम नमक निशांन की कसम,
झुकना कभी नहीं,
पीछे हटना कभी नहीं,
जीवन भले ही, क्यों ना कुर्बान हो।
बडे चलो चडे चलो।
दुष्मनो के सिरों को कुचलते चलो।

15 Dec 2012

1 comments:

सुबीर रावत said...

वीर रस से भरी हुयी रांेमांचित करती एक सुन्दर रचना। आभार।