Saturday, 25 May 2013

ज्वानी का उलार मां






ज्यादा नी दौड़ छोरी
ज्वानी का उलार मां
खुटि सम्भाली धरण
माया का बजार मां

प्योंली सी पिंगलू गात तेरू
नी रैन्दू ढकेण मां
प्रेमी किरमुला चटकैला  
झूटा प्यार का आड़ मा
ज्यादा नी दौड़ छोरी
ज्वानी का उलार मां

बुरांस सी होंटूडी अपणी
नी खोली जाण बेकार मा
रसिक भौंरा चूसला
रस तों कु लालच मा
ज्यादा नी दौड़ छोरी
ज्वानी का उलार मां

चार दिन की ज्वानी
नी उडी जाण अका मा
फथ भूय्यां पडेली
ब्यों हूण का द्वी शाल मा
ज्यादा नी दौड़ छोरी
ज्वानी का उलार मां

ज्यादा गुमान नी कन
रूप और श्रृंगार मा
त्वेन सुधी फंस जाण
अधूरा प्रेम का जाल मां
ज्यादा नी दौड़ छोरी
ज्वानी का उलार मां


28 फरवरी 2013

0 comments: